Sunday, 10 May 2015

Yaadein.. back to childhood..

ज़िंदगी की  दौड़  में 
हम इतने व्यस्त  हो  गए हैं।   
कि 
आज तमाम अपनों  के बीच 
खुद  में उलझ गए हैं। 
 बचपन में 
अपनों के गोद में 
प्यार भरे अपनोपन के साथ 
कितने खुसनसीब समझते थे 
पर  आज 
उन लम्हों को पाने को 
खुद तरसते हैं हम 
वो माँ की गोद में 
सिर रखकर सोना 
अपनी हरेक बातों का कहना 
पर आज 
ज़माना  बदल गया है 
इस भाग - दौड़ भरी  जिंदगी में 
हम अपनों को भूला देते हैं 
पर यक़ीनन 
जब व्यस्तता हमें घर कर जाती है 
तब हमें याद आती  है वो 
अपनों का प्यार 
जिनके छाँव में हम 
अपनी बचपन गुजारे होते हैं।